फलों की दुनिया अनेक रंगों, रूपों और स्वादों से भरपूर है. हर फल अपने आप में खास होता है और हमारे शरीर को पोषण देता है. आजकल हर कोई चाहता है कि उसकी ताकत और तंदुरुस्ती बनी रहे. ऐसे में रूबस लसीओकार्पस (जिसे रूबस नाइवस भी कहा जाता है) आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है.
यह भी पढ़िए:- ऑफ-रोडिंग का नया शहंशाह Maruti की धाकड़ Suv कड़क फीचर्स और दमदार इंजन से लेगी Thar को आड़े हाथ देखे कीमत
यह फल अपने अनोखे गुणों के लिए जाना जाता है. आइए जानते हैं रूबस लसीओकार्पस के फायदे और इसकी खेती के बारे में.
रूबस लसीओकार्पस के फायदे
- पेट संबंधी समस्याओं को दूर करने में मददगार: रूबस लसीओकार्पस के फल में पाए जाने वाले तत्व पेट की ख़राबी को दूर रखने में मदद करते हैं. साथ ही पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं.
- एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर: यह फल एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है, जो शरीर को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाते हैं.
- रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करता है: रूबस लसीओकार्पस विटामिन सी और अन्य खनिजों से भरपूर होता है, जो रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में मदद करता है.
खेती करके मुनाफा कमाएं
अगर आप फल उगाकर अच्छा मुनाफा कमाना चाहते हैं, तो रूबस लसीओकार्पस की खेती आपके लिए फ़ायदेमंद हो सकती है. हालांकि, इसकी खेती करने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है.
- बीजों का प्रबंधन: सबसे पहले आपको इस फल के बीजों का इंतजाम करना होगा.
- खेत की तैयारी: खेत को अच्छी तरह तैयार करें और सिंचाई की सुविधा सुनिश्चित करें.
- पौधे का विकास: ध्यान दें कि इस पौधे को फल देने में कम से कम 3 साल लग जाते हैं, वहीं पेड़ को पूरी तरह से विकसित होने में 5 साल का समय लग सकता है.
- कमाई: इसकी खेती zwar भले ही थोड़ी देर से फलती है, लेकिन एक बार पेड़ लग जाने के बाद हर साल आपको भरपूर मात्रा में फल मिलते रहेंगे. बाजार में इसकी कीमत 1000 रुपये प्रति किलो के आसपास मिलती है. आप एक एकड़ भूमि पर भी इसकी खेती शुरू कर सकते हैं और अच्छी कमाई कर सकते हैं.
यह भी पढ़िए:- विश्व में इस बूटी का सबसे बड़ा नाम अच्छी-अच्छी बीमारियों की लगाती है वाट छलकने लगती है आँखों से जवानी
रूबस लसीओकार्पस अपने अनोखे गुणों वाला फल है. इसकी खेती भले ही थोड़ी देर से मुनाफा देती है, लेकिन लंबे समय में यह आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकती है. अगर आप इसकी खेती करने का विचार कर रहे हैं, तो कृषि विशेषज्ञों की सलाह ज़रूर लें.







